ज़िंदगी तुझको न पहचाना कभी
कौन है तू ये नहीं जाना कभी
झूटको सच मानकर सब चल दिए
और वो बदला न अफ़साना कभी
इन ग़मोंसे बात थोड़ी कर तो लूँ
ऐ ख़ुशी फ़ुरसत से तू आना कभी
ठोकरें तो खा रहा है दिल मेरा
जानकर या बनके अंजाना कभी
बात करने की इजाज़त मिल गयी
ख़ामुशी का भार के जुर्माना कभी
- कुमार जावडेकर
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