शनिवार, २२ डिसेंबर, २०१८

रहते हो क्यूँ परेशां

मेरा ख़याल लेके रहते हो क्यूँ परेशां
अक्सर ये हाल लेके रहते हो क्यूँ परेशां

बस वो थे ख़्वाहिशों के थोड़े मिज़ाज, लेकिन -
दिल में मलाल लेके रहते हो क्यूँ परेशां

आँखें जो कह रहीं हैं, बातें छुपा रहीं हैं
ऐसे सवाल लेके रहते हो क्यूँ परेशां

ये इश्क़ है या चाहत, या ख़्वाब या हक़ीक़त?
इतने सवाल लेके रहते हो क्यूँ परेशां

कोई तो होगा दिल में, तुम मान लो ना अब तो
यूँ लाल गाल लेके रहते हो क्यूँ परेशां

अब मैं तो रह गया हूँ बस इक सलीब बनकर
मेरी मिसाल लेके रहते हो क्यूँ परेशां

कुमार जावडेकर



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